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ramayan 7.18.22: सबसे पहले इन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक नील पंख वाले मोर से कहा - 'हे धर्मज्ञ! मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें सर्प से भय नहीं होगा।॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.18.22 
हर्षात् तदाब्रवीदिन्द्रो मयूरं नीलबर्हिणम्।
प्रीतोऽस्मि तव धर्मज्ञ भुजङ्गाद्धि न ते भयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सबसे पहले इन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक नील पंख वाले मोर से कहा - 'हे धर्मज्ञ! मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें सर्प से भय नहीं होगा।॥ 22॥
 
First of all Indra said joyfully to the blue-feathered peacock - 'O Dharmajnya! I am very pleased with you. You will not be afraid of the snake.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)