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ramayan 7.18.20: यज्ञ में बैठे हुए महर्षियों को खाकर तथा उनके रक्त से तृप्त होकर रावण पुनः पृथ्वी पर विचरण करने लगा।   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.18.20 
तान् भक्षयित्वा तत्रस्थान् महर्षीन् यज्ञमागतान्।
वितृप्तो रुधिरैस्तेषां पुन: सम्प्रययौ महीम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ में बैठे हुए महर्षियों को खाकर तथा उनके रक्त से तृप्त होकर रावण पुनः पृथ्वी पर विचरण करने लगा।
 
Having eaten the great sages sitting at the sacrifice and being satiated with their blood, Ravana again started wandering on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)