Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.18.16-17h: यह महेश्वर यज्ञ प्रारम्भ हो चुका है। यदि यह पूर्ण न हुआ, तो तुम्हारे समस्त कुल को भस्म कर देगा। जिसने यज्ञ में दीक्षा ले ली है, उसके लिए युद्ध का अवसर कहाँ है? जिसने यज्ञ में दीक्षा ले ली है, उसके लिए क्रोध का स्थान कहाँ है?॥16 1/2॥ | ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह महेश्वर यज्ञ प्रारम्भ हो चुका है। यदि यह पूर्ण न हुआ, तो तुम्हारे समस्त कुल को भस्म कर देगा। जिसने यज्ञ में दीक्षा ले ली है, उसके लिए युद्ध का अवसर कहाँ है? जिसने यज्ञ में दीक्षा ले ली है, उसके लिए क्रोध का स्थान कहाँ है?॥16 1/2॥
‘This Maheshwar Yagya has been started. If it is not completed, it will burn your entire clan. For one who has taken initiation in the Yagya, where is the opportunity for war? Where is the place for anger in a person who has taken initiation in the Yagya?॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥