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ramayan 7.18.15-16h: उन महामुनि ने महाराज मरुत्त से प्रेमपूर्वक कहा, 'हे राजन! यदि आप मेरी बात सुनना और उस पर ध्यान देना उचित समझते हैं, तो सुनिए। आपके लिए युद्ध करना उचित नहीं है॥ 15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.18.15-16h 
सोऽब्रवीत् स्नेहसंयुक्तं मरुत्तं तं महानृषि:॥ १५॥
श्रोतव्यं यदि मद्वाक्यं सम्प्रहारो न ते क्षम:।
 
 
अनुवाद
उन महामुनि ने महाराज मरुत्त से प्रेमपूर्वक कहा, 'हे राजन! यदि आप मेरी बात सुनना और उस पर ध्यान देना उचित समझते हैं, तो सुनिए। आपके लिए युद्ध करना उचित नहीं है॥ 15 1/2॥
 
That great sage said to Maharaja Marutta with love, 'O King! If you think it is right to listen to me and pay attention to it, then listen. It is not right for you to fight.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)