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ramayan 7.18.14-15h: तत्पश्चात् राजा मरुत अपना धनुष-बाण लेकर बड़े क्रोध से युद्ध के लिए निकले, किन्तु महर्षि संवर्त ने उनका मार्ग रोक लिया ॥14 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.18.14-15h 
तत: शरासनं गृह्य सायकांश्च नराधिप:॥ १४॥
रणाय निर्ययौ क्रुद्ध: संवर्तो मार्गमावृणोत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा मरुत अपना धनुष-बाण लेकर बड़े क्रोध से युद्ध के लिए निकले, किन्तु महर्षि संवर्त ने उनका मार्ग रोक लिया ॥14 1/2॥
 
Thereafter King Marut took up his bow and arrow and went out for the battle with great anger, but Maharishi Samvarta blocked his way. ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)