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ramayan 7.18.13-14h: तू जो कुछ कह रहा है, वैसा मैंने पहले कभी नहीं सुना। मूर्ख! अब चुपचाप खड़ा रह। तू मेरे हाथ से जीवित नहीं बच सकेगा। आज मैं अपने तीखे बाणों से तुझे मारकर यमलोक भेज दूँगा।॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.18.13-14h 
श्रुतपूर्वं हि न मया भाषसे यादृशं स्वयम्।
तिष्ठेदानीं न मे जीवन् प्रतियास्यसि दुर्मते॥ १३॥
अद्य त्वां निशितैर्बाणै: प्रेषयामि यमक्षयम्।
 
 
अनुवाद
तू जो कुछ कह रहा है, वैसा मैंने पहले कभी नहीं सुना। मूर्ख! अब चुपचाप खड़ा रह। तू मेरे हाथ से जीवित नहीं बच सकेगा। आज मैं अपने तीखे बाणों से तुझे मारकर यमलोक भेज दूँगा।॥13 1/2॥
 
‘Whatever you are saying, I have never heard such a thing before. Foolish one! Stand still now. You will not be able to escape from my hands alive. Today I will kill you with my sharp arrows and send you to Yamaloka.'॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)