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ramayan 7.18.12: तीनों लोकों में तुम्हारे समान कोई दूसरा पुरुष नहीं है। पूर्वकाल में किस शुद्ध धर्म का पालन करके तुमने वर प्राप्त किया था?॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.18.12 
न त्वया सदृश: श्लाघ्यस्त्रिषु लोकेषु विद्यते।
कं त्वं प्राक् केवलं धर्मं चरित्वा लब्धवान् वरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में तुम्हारे समान कोई दूसरा पुरुष नहीं है। पूर्वकाल में किस शुद्ध धर्म का पालन करके तुमने वर प्राप्त किया था?॥12॥
 
‘There is no other man as desirable as you in the three worlds. By following which pure Dharma did you obtain the boon in the past?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)