श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.17.8-9h 
कुशध्वजो नाम पिता ब्रह्मर्षिरमितप्रभ:॥ ८॥
बृहस्पतिसुत: श्रीमान् बुद्धॺा तुल्यो बृहस्पते:।
 
 
अनुवाद
मेरे पिता तेजस्वी ब्रह्मर्षि श्रीमान् कुशध्वज थे, जो बृहस्पति के पुत्र थे और बुद्धि में भी उन्हीं के समान माने जाते थे ॥8 1/2॥
 
My father was the brilliant Brahmarshi Shriman Kushadhwaj, who was the son of Brihaspati and was considered equal to him in intelligence also. 8 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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