श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  7.17.6-7h 
कस्यासि किमिदं भद्रे कश्च भर्ता वरानने।
येन सम्भुज्यसे भीरु स नर: पुण्यभाग् भुवि॥ ६॥
पृच्छत: शंस मे सर्वं कस्य हेतो: परिश्रम:।
 
 
अनुवाद
भद्रे! तुम किसकी पुत्री हो? तुम कौन-सा व्रत कर रही हो? सुमुखी! तुम्हारे पति कौन हैं? भीरु! जिस पुरुष के साथ तुम्हारा सम्बन्ध है, वह इस पृथ्वी पर बहुत पुण्यात्मा है। मैं जो कुछ पूछती हूँ, वह सब मुझे बताओ। यह कठिन परिश्रम किस फल के लिए किया जा रहा है?॥6 1/2॥
 
‘Bhadre! Whose daughter are you? Which fast are you observing? Sumukhi! Who is your husband? Bhiru! The man with whom you have a relationship is a very pious soul on this earth. Tell me everything I ask. For what result is this hard work being done?’॥ 6 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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