श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.17.23 
अहं लङ्कापतिर्भद्रे दशग्रीव इति श्रुत:।
तस्य मे भव भार्या त्वं भुङ्क्ष्व भोगान् यथासुखम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
भद्र! मैं लंका का राजा हूँ। मेरा नाम दशग्रीव है। तुम मेरी पत्नी बन जाओ और सुखपूर्वक उत्तम सुखों का उपभोग करो॥ 23॥
 
Bhadra! I am the king of Lanka. My name is Dashagriva. You become my wife and enjoy the best pleasures happily.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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