श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.17.22 
त्वं सर्वगुणसम्पन्ना नार्हसे वक्तुमीदृशम्।
त्रैलोक्यसुन्दरी भीरु यौवनं तेऽतिवर्तते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'तुम सर्वगुण संपन्न हो और तीनों लोकों में सबसे सुंदर स्त्री हो। तुम्हें ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए। कायर! तुम्हारी जवानी ढल रही है।'
 
‘You are blessed with all the virtues and are the most beautiful woman in the three worlds. You should not say such things. You coward! Your youth is passing away.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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