श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.17.20 
सोऽब्रवीद् रावणो भूयस्तां कन्यां सुमहाव्रताम्।
अवरुह्य विमानाग्रात् कन्दर्पशरपीडित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर प्रेमबाण से आहत रावण विमान से उतरा और उस महान् एवं उत्तम व्रत करने वाली कन्या से पुनः बोला-॥20॥
 
On hearing this, Ravana, struck by the arrow of love, alighted from his plane and spoke again to the girl who was observing a great and excellent fast -॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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