श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.17.10-11h 
ततो देवा: सगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगा:॥ १०॥
ते चापि गत्वा पितरं वरणं रोचयन्ति मे।
 
 
अनुवाद
‘जब मैं बड़ा हुआ, तब देवता, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस और नाग भी मेरे पिता के पास जाकर उनसे मुझे मांगने लगे।॥10 1/2॥
 
‘When I grew up, the gods, Gandharvas, Yakshas, ​​demons and serpents also began going to my father and asking for me from him.॥ 10 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas