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श्लोक 7.17.10-11h  |
ततो देवा: सगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगा:॥ १०॥
ते चापि गत्वा पितरं वरणं रोचयन्ति मे। |
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| अनुवाद |
| ‘जब मैं बड़ा हुआ, तब देवता, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस और नाग भी मेरे पिता के पास जाकर उनसे मुझे मांगने लगे।॥10 1/2॥ |
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| ‘When I grew up, the gods, Gandharvas, Yakshas, demons and serpents also began going to my father and asking for me from him.॥ 10 1/2॥ |
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