श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  7.16.8-9 
इति वाक्यान्तरे तस्य कराल: कृष्णपिङ्गल:।
वामनो विकटो मुण्डी नन्दी ह्रस्वभुजो बली॥ ८॥
तत: पार्श्वमुपागम्य भवस्यानुचरोऽब्रवीत् ।
नन्दीश्वरो वचश्चेदं राक्षसेन्द्रमशङ्कित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
बातचीत के बीच में ही भगवान शंकर के पार्षद नन्दीश्वर रावण के पास आये। वे अत्यंत भयंकर रूप वाले थे। उनके शरीर के अंग काले और गुलाबी रंग के थे। वे नाटे कद के और भयंकर रूप वाले थे। उनका सिर मुंडा हुआ था और भुजाएँ छोटी थीं। वे अत्यंत बलवान थे। नन्दिनी ने निःसंकोच होकर राक्षसराज दशग्रीव से इस प्रकार कहा - 8-9॥
 
In the midst of his conversation, Lord Shankar's advisor Nandishwar came to Ravana, who was very formidable in appearance. His body parts were black and pink in colour. He was short and of formidable appearance. His head was shaven and his arms were short. He was very strong. Nandini, without any doubt, said to the demon king Dashagriva in this way: 8-9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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