श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.16.6 
ततोऽब्रवीत् तदा राम मारीचो बुद्धिकोविद:।
नेदं निष्कारणं राजन् पुष्पकं यन्न गच्छति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! तब बुद्धिमान मारीच ने कहा, 'राजन्! इस पुष्पक विमान के आगे न बढ़ने के पीछे अवश्य ही कोई कारण होगा। ऐसा नहीं है कि ऐसी घटना अकारण घटित हुई हो।'
 
Shri Ram! Then the intelligent Maricha said, 'King! There must be some reason behind this Pushpak Vimana not moving forward. It is not the case that such an incident has happened without any reason.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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