श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.16.49 
अपरे दुर्जयं रक्षो जानन्त: प्राज्ञसम्मता:।
जिता: स्म इत्यभाषन्त राक्षसं बलदर्पितम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
अन्य क्षत्रिय, जो बुद्धिमान माने जाते थे और उस राक्षस को अजेय समझते थे, उन्होंने उस अभिमानी रात्रि प्राणी के सामने अपनी हार स्वीकार कर ली ॥49॥
 
The other Kshatriyas, who were considered wise and thought that the demon was invincible, accepted their defeat in front of that proud night creature. ॥ 49॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे षोडश: सर्ग: ॥ १ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सोलहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ६॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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