श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.16.46 
एवं महेश्वरेणैव कृतनामा स रावण:।
अभिवाद्य महादेवमारुरोहाथ पुष्पकम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान शंकर से नूतन नाम प्राप्त करके रावण ने उन्हें प्रणाम किया और फिर पुष्पकविमान पर सवार हो गया ॥46॥
 
In this way, after receiving the new name Nutan from Lord Shankar, Ravana bowed to him. After that he boarded the Pushpakvimana. 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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