| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति » श्लोक 41 |
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| | | | श्लोक 7.16.41  | अवध्यत्वं मया प्राप्तं देवगन्धर्वदानवै:।
राक्षसैर्गुह्यकैर्नागैर्ये चान्ये बलवत्तरा:॥ ४१॥ | | | | | | अनुवाद | | मैंने देवताओं, गन्धर्वों, दानवों, राक्षसों, गुह्यकों, नागों तथा अन्य शक्तिशाली प्राणियों से अविनाशी होने का वरदान प्राप्त किया है ॥41॥ | | | | I have received the boon of becoming indestructible from gods, Gandharvas, demons, Rakshasas, Guhyakas, Nagas and other powerful beings. 41॥ | | ✨ ai-generated | | |
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