श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.16.40 
एवमुक्तस्तु लङ्केश: शम्भुना स्वयमब्रवीत्।
प्रीतो यदि महादेव वरं मे देहि याचत:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर की यह बात सुनकर लंकापति बोला, "महादेव! यदि आप प्रसन्न हों तो मुझे वर प्रदान करें। मैं आपसे वर माँगता हूँ।"
 
On hearing this from Lord Shankar, Lankapati said, 'Mahadev! If you are pleased, please grant me a boon. I request you for a boon.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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