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ramayan 7.16.33: तुम उन्हें प्रणाम करके उनकी शरण में जाओ। भगवान शंकर बड़े दयालु हैं। वे प्रसन्न होकर तुम पर कृपा करेंगे।॥33॥   |   ramayan सर्ग 7.16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.16.33 
स्तुतिभि: प्रणतो भूत्वा तमेव शरणं व्रज।
कृपालु: शङ्करस्तुष्ट: प्रसादं ते विधास्यति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तुम उन्हें प्रणाम करके उनकी शरण में जाओ। भगवान शंकर बड़े दयालु हैं। वे प्रसन्न होकर तुम पर कृपा करेंगे।॥33॥
 
‘You should bow before Him with prayers and seek His refuge. Lord Shankar is very merciful. He will be pleased and shower His blessings on you.'॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)