श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.16.31 
समुद्राश्चापि संक्षुब्धाश्चलिताश्चापि पर्वता:।
यक्षा विद्याधरा: सिद्धा: किमेतदिति चाब्रुवन्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
समुद्र में ज्वार-भाटा मच गया। पर्वत हिलने लगे और यक्ष, विद्याधर और सिद्ध एक-दूसरे से पूछने लगे कि 'क्या हुआ?'॥31॥
 
The oceans were raging with high tide. The mountains began to shake and the Yakshas, ​​Vidyadharas and Siddhas began to ask each other, 'What has happened?'॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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