श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.16.30 
मेनिरे वज्रनिष्पेषं तस्यामात्या युगक्षये।
तदा वर्त्मसु चलिता देवा इन्द्रपुरोगमा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उसके मन्त्रियों ने सोचा कि प्रलयकाल आ गया है और भयंकर वज्र गिरने लगा है। उस समय इन्द्र आदि देवता मार्ग से भटक गए॥30॥
 
His ministers thought that the time of doomsday had arrived and a devastating thunderbolt had begun to fall. At that time the gods like Indra got lost on their way.॥ 30॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd