श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.16.26 
चालनात् पर्वतस्यैव गणा देवस्य कम्पिता:।
चचाल पार्वती चापि तदाश्लिष्टा महेश्वरम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पर्वत के हिलने से भगवान शंकर के सभी गण काँप उठे। देवी पार्वती भी व्याकुल होकर भगवान शंकर से लिपट गईं॥26॥
 
Due to the shaking of the mountain, all the members of Lord Shankar trembled. Goddess Parvati also got disturbed and hugged Lord Shankar. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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