श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.16.25 
एवमुक्त्वा ततो राम भुजान् विक्षिप्य पर्वते।
तोलयामास तं शीघ्रं स शैल: समकम्पत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! ऐसा कहकर दशग्रीव ने पर्वत के निचले भाग पर अपनी भुजाएँ रख दीं और उसे शीघ्रता से उठाने का प्रयत्न किया। पर्वत हिलने लगा।
 
Shri Ram! Saying this, Dashagriva put his arms on the lower part of the mountain and tried to lift it quickly. The mountain started shaking. 25.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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