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ramayan 7.16.24: शंकरजी किस बल से यहाँ प्रतिदिन राजा की भाँति क्रीड़ा करते हैं? उन्हें इस बात का भान ही नहीं कि उनके सामने भय का स्थान विद्यमान है॥24॥   |   ramayan सर्ग 7.16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.16.24 
केन प्रभावेण भवो नित्यं क्रीडति राजवत्।
विज्ञातव्यं न जानीते भयस्थानमुपस्थितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शंकरजी किस बल से यहाँ प्रतिदिन राजा की भाँति क्रीड़ा करते हैं? उन्हें इस बात का भान ही नहीं कि उनके सामने भय का स्थान विद्यमान है॥24॥
 
‘By what force does Shankara play here every day like a king? He is unaware of the fact that a place of fear is present before him.’॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)