श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.16.22 
अचिन्तयित्वा स तदा नन्दिवाक्यं महाबल:।
पर्वतं तु समासाद्य वाक्यमाह दशानन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
परंतु उस समय महाबली रावण ने नंदी की बातों पर कुछ भी ध्यान न दिया और उस पर्वत के पास जाकर बोला-॥22॥
 
But at that time the mighty Ravana did not pay any heed to Nandi's words and went near that mountain and said -॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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