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श्लोक 7.16.22  |
अचिन्तयित्वा स तदा नन्दिवाक्यं महाबल:।
पर्वतं तु समासाद्य वाक्यमाह दशानन:॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| परंतु उस समय महाबली रावण ने नंदी की बातों पर कुछ भी ध्यान न दिया और उस पर्वत के पास जाकर बोला-॥22॥ |
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| But at that time the mighty Ravana did not pay any heed to Nandi's words and went near that mountain and said -॥ 22॥ |
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