श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.16.21 
इत्युदीरितवाक्ये तु देवे तस्मिन् महात्मनि।
देवदुन्दुभयो नेदु: पुष्पवृष्टिश्च खाच्च्युता॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाहृदय भगवान नन्दी के ऐसा कहते ही देवताओं के नगाड़े बजने लगे और आकाश से पुष्पवर्षा होने लगी ॥21॥
 
As soon as the great-hearted Lord Nandi said this, the drums of the gods started sounding and flowers began to rain from the sky. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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