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ramayan 7.16.2: वहाँ पहुँचकर दशग्रीव ने देखा कि सरकण्डों का विशाल वन स्वर्णिम आभा से युक्त तथा किरणों से परिपूर्ण होकर दूसरे सूर्य के समान चमक रहा है।   |   ramayan सर्ग 7.16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.16.2 
अथापश्यद् दशग्रीवो रौक्मं शरवणं महत्।
गभस्तिजालसंवीतं द्वितीयमिव भास्करम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर दशग्रीव ने देखा कि सरकण्डों का विशाल वन स्वर्णिम आभा से युक्त तथा किरणों से परिपूर्ण होकर दूसरे सूर्य के समान चमक रहा है।
 
Reaching there, Daśagriva saw the huge forest of reeds having golden luster and being filled with rays, it was shining like another Sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)