श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.16.18 
नखदंष्ट्रायुधा: क्रूर मन:सम्पातरंहस:।
युद्धोन्मत्ता बलोद्रिक्ता: शैला इव विसर्पिण:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'क्रूर राक्षसों! इन वानरों के हथियार नख और दाँत होंगे और उनकी गति मन के समान होगी। वे युद्ध के लिए उन्मत्त होंगे, अत्यंत शक्तिशाली होंगे और चलते समय पर्वतों के समान प्रतीत होंगे।'
 
‘Cruel demons! Nails and teeth will be the weapons of these monkeys and their speed will be like the mind. They will be crazy for war and will be extremely powerful and will appear like mountains while moving.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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