श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  7.16.16-17 
यस्माद् वानररूपं मामवज्ञाय दशानन।
अशनीपातसंकाशमपहासं प्रमुक्तवान्॥ १६॥
तस्मान्मद्वीर्यसंयुक्ता मद्रूपसमतेजस:।
उत्पत्स्यन्ति वधार्थं हि कुलस्य तव वानरा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
दशानन! तूने मुझे वानर रूप में देखकर मेरी उपेक्षा की है और वज्र के समान भयंकर अट्टहास किया है; इसलिए तेरे कुल का नाश करने के लिए मेरे समान वीर, सुन्दर और तेज से युक्त वानर उत्पन्न होंगे॥ 16-17॥
 
Dashanana! You have ignored me after seeing me in the form of a monkey and laughed horribly like a thunderbolt; therefore, to destroy your clan, monkeys endowed with valour, beauty and brilliance like me will be born.॥ 16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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