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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.16.14 
तं दृष्ट्वा वानरमुखमवज्ञाय स राक्षस:।
प्रहासं मुमुचे तत्र सतोय इव तोयद:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उसका मुख बन्दर के समान था। उसे देखते ही रात्रि-विनाशक ने उसका तिरस्कार किया और भीगे हुए बादल के समान गम्भीर स्वर में जोर-जोर से हंसने लगा।
 
His face was like that of a monkey. On seeing him, the night-destroyer despised him and started laughing loudly in a deep voice like a wet cloud. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)