श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.16.13 
सोऽपश्यन्नन्दिनं तत्र देवस्यादूरत: स्थितम्।
दीप्तं शूलमवष्टभ्य द्वितीयमिव शङ्करम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि भगवान शंकर से थोड़ी दूरी पर नंदी हाथ में चमकता हुआ त्रिशूल लिए हुए दूसरे शिव के समान खड़े हैं॥13॥
 
Reaching there he saw that at a little distance from Lord Shankar, Nandi was standing like another Shiva holding a gleaming trident in his hand.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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