श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  7.16.11-12 
इति नन्दिवच: श्रुत्वा क्रोधात् कम्पितकुण्डल:॥ ११॥
रोषात् तु ताम्रनयन: पुष्पकादवरुह्य स:।
कोऽयं शङ्कर इत्युक्त्वा शैलमूलमुपागत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नंदी के ये वचन सुनकर दशग्रीव क्रोधित हो गए। उनके कुण्डल हिलने लगे। क्रोध से उनकी आंखें लाल हो गईं और वे पुष्पक से उतरकर बोले- ‘ये शंकर कौन हैं?’ ऐसा कहकर वे पर्वत की तलहटी में आ गए। 11-12।
 
Hearing these words of Nandi, Dashagriva became furious. His earrings started shaking. His eyes became red with anger and he got down from Pushpaka and said- 'Who is this Shankar?' Saying this, he came to the base of the mountain. 11-12.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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