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ramayan 7.16.10-11h: ‘दशग्रीव! लौट जाओ। भगवान शंकर इस पर्वत पर क्रीड़ा करते हैं। यहाँ सुपर्ण, नाग, यक्ष, देवता, गंधर्व और राक्षस आदि सभी प्राणियों का आना-जाना बंद हो गया है।’॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.16.10-11h 
निवर्तस्व दशग्रीव शैले क्रीडति शंकर:।
सुपर्णनागयक्षाणां देवगन्धर्वरक्षसाम्॥ १०॥
सर्वेषामेव भूतानामगम्य: पर्वत: कृत:।
 
 
अनुवाद
‘दशग्रीव! लौट जाओ। भगवान शंकर इस पर्वत पर क्रीड़ा करते हैं। यहाँ सुपर्ण, नाग, यक्ष, देवता, गंधर्व और राक्षस आदि सभी प्राणियों का आना-जाना बंद हो गया है।’॥10 1/2॥
 
‘Dashagriva! Go back. Lord Shankar plays on this mountain. The coming and going of all creatures like Suparna, Nagas, Yakshas, ​​Gods, Gandharvas and demons has been stopped here.'॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)