श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 16: नन्दीश्वर का रावण को शाप, भगवान् शङ्कर द्वारा रावण का मान भङ्ग तथा उनसे चन्द्रहास नामक खड्ग की प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.16.1 
स जित्वा धनदं राम भ्रातरं राक्षसाधिप:।
महासेनप्रसूतिं तद् ययौ शरवणं महत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
(अगस्त्यजी कहते हैं—) रघुकुलनन्दन राम! राक्षसराज दशग्रीव अपने भाई कुबेर को हराकर 'शरवन' नामक विशाल सरकण्डे के वन में गया, जहाँ महासेन कार्तिकेय का जन्म हुआ।॥1॥
 
(Agastyaji says—) Raghukulnandan Ram! After defeating his brother Kuber, the demon king Dashagriva went to the huge reed forest known as 'Sharavan', where Mahasen Kartikeya was born. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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