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ramayan 7.15.5: भयंकर युद्ध करते हुए वे चील की तरह तेज़ गति से इधर-उधर घूमने लगे। एक कहता, 'मुझे लड़ने का मौका दो।' दूसरा कहता, 'मैं यहाँ से पीछे नहीं हटना चाहता।' फिर तीसरा कहता, 'मुझे अपना हथियार दो।'   |   ramayan सर्ग 7.15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.15.5 
कुर्वन्तस्तुमुलं युद्धं चरन्त: श्येनवल्लघु।
बाढं प्रयच्छ नेच्छामि दीयतामिति भाषिण:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भयंकर युद्ध करते हुए वे चील की तरह तेज़ गति से इधर-उधर घूमने लगे। एक कहता, 'मुझे लड़ने का मौका दो।' दूसरा कहता, 'मैं यहाँ से पीछे नहीं हटना चाहता।' फिर तीसरा कहता, 'मुझे अपना हथियार दो।'
 
While fighting a fierce battle they started moving everywhere at a fast speed like eagles. One would say, 'Give me a chance to fight.' Another would say, 'I don't want to retreat from here.' Then the third would say, 'Give me your weapon.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)