Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.15.39-40h: उसकी गति मन के समान तीव्र थी। वह उस पर बैठे लोगों की इच्छानुसार कहीं भी जा सकता था और चालक की इच्छानुसार बड़ा या छोटा रूप धारण कर सकता था। उस उड़ने वाले विमान में रत्नों और सोने से बनी सीढ़ियाँ और तपे हुए सोने से बनी वेदियाँ थीं। | ramayan सर्ग 7.15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसकी गति मन के समान तीव्र थी। वह उस पर बैठे लोगों की इच्छानुसार कहीं भी जा सकता था और चालक की इच्छानुसार बड़ा या छोटा रूप धारण कर सकता था। उस उड़ने वाले विमान में रत्नों और सोने से बनी सीढ़ियाँ और तपे हुए सोने से बनी वेदियाँ थीं।
Its speed was as fast as the mind. It could go anywhere according to the wishes of the people sitting on it and it could assume a form as big or small as the driver wished. That flying plane had stairs made of gems and gold and altars made of heated gold. 39 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥