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ramayan 7.15.36-37h: तदनन्तर पद्म आदि निधियों के अधिष्ठाता देवताओं ने उसे घेर लिया, उसे उठा लिया, नंदनवन में ले गए और उसे चेतन किया ॥36 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.15.36-37h 
तत: पद्मादिभिस्तत्र निधिभि: स तदा वृत:॥ ३६॥
धनदोच्छ्वासितस्तैस्तु वनमानीय नन्दनम्।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पद्म आदि निधियों के अधिष्ठाता देवताओं ने उसे घेर लिया, उसे उठा लिया, नंदनवन में ले गए और उसे चेतन किया ॥36 1/2॥
 
Thereafter, the presiding deities of treasures like Padma etc. surrounded him, picked him up, took him to Nandanvan and made him conscious. 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)