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श्लोक 21
श्लोक
7.15.21
मातरं पितरं विप्रमाचार्यं चावमन्यते।
स पश्यति फलं तस्य प्रेतराजवशं गत:॥ २१॥
अनुवाद
जो मनुष्य माता, पिता, ब्राह्मण और गुरु का अनादर करता है, वह यमराज के चंगुल में पड़ता है और अपने पापों का फल भोगता है॥ 21॥
He who disrespects his mother, father, Brahmin and teacher falls into the clutches of Yamaraja and suffers the consequences of his sins.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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