श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.14.30 
तत: प्रदुद्रुवु: सर्वे दृष्ट्वा रक्ष:पराक्रमम्।
ततो नदीर्गुहाश्चैव विविशुर्भयपीडिता:।
त्यक्तप्रहरणा: श्रान्ता विवर्णवदनास्तदा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राक्षस का पराक्रम देखकर सभी यक्ष भाग गए। कुछ नदियों में कूद गए और कुछ भयभीत होकर गुफाओं में घुस गए। सभी ने अपने हथियार त्याग दिए थे। सभी थक गए थे और सभी के चेहरों की चमक फीकी पड़ गई थी ॥30॥
 
Seeing the might of the demon, all the Yakshas fled. Some jumped into the rivers and some entered the caves in fear. All had given up their weapons. All were tired and the glow on everyone's faces had faded. ॥30॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे चतुर्दश: सर्ग: ॥ १ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौदहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)