श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.14.17 
केचित् समाहता भग्ना: पतिता: समरे क्षितौ।
ओष्ठांश्च दशनैस्तीक्ष्णैरदशन् कुपिता रणे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
समरांगण में कितने ही यक्ष शस्त्रों के प्रहार से छिन्न-भिन्न होकर गिर पड़े। कितने ही रणभूमि में क्रोधित होकर अपने तीखे दांतों से अपने होठ काट रहे थे। 17॥
 
Many Yakshas fell to pieces in the battle of Samarangana due to being disintegrated by the blows of weapons. How many were angry on the battlefield, biting their lips with their sharp teeth. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)