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ramayan 7.13.6: वह भवन सब प्रकार से सुखमय और सुन्दर था। मेरु की पुण्यमयी गुफा के समान वह सर्वत्र सुख प्रदान करने वाला था। राक्षसराज रावण ने कुम्भकर्ण के लिए ऐसा ही सुन्दर और सुविधायुक्त शयनगृह बनवाया था। 6॥   |   ramayan सर्ग 7.13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.13.6 
मनोहरं सर्वसुखं कारयामास राक्षस:।
सर्वत्र सुखदं नित्यं मेरो: पुण्यां गुहामिव॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वह भवन सब प्रकार से सुखमय और सुन्दर था। मेरु की पुण्यमयी गुफा के समान वह सर्वत्र सुख प्रदान करने वाला था। राक्षसराज रावण ने कुम्भकर्ण के लिए ऐसा ही सुन्दर और सुविधायुक्त शयनगृह बनवाया था। 6॥
 
That building was pleasant and beautiful in every way. Like the virtuous cave of Meru, it always provided happiness everywhere. The demon king Ravana built such a beautiful and convenient dormitory for Kumbhakarna. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)