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ramayan 7.13.41: तत्पश्चात स्वस्तिवाचन करके रावण रथ पर सवार होकर तीनों लोकों को जीतने की इच्छा से उस स्थान पर गया जहाँ धनपति कुबेर रहते थे॥41॥   |   ramayan सर्ग 7.13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.13.41 
तत: कृतस्वस्त्ययनो रथमारुह्य रावण:।
त्रैलोक्यविजयाकांक्षी ययौ यत्र धनेश्वर:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात स्वस्तिवाचन करके रावण रथ पर सवार होकर तीनों लोकों को जीतने की इच्छा से उस स्थान पर गया जहाँ धनपति कुबेर रहते थे॥41॥
 
After that, after reciting the Swastiva, Ravana boarded the chariot and went to the place where Dhanpati Kuber lived with the desire to conquer all the three worlds. 41॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे त्रयोदश: सर्ग: ॥ १ ३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)