श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.13.35-36h 
हितं नैष ममैतद्धि ब्रवीति धनरक्षक:॥ ३५॥
महेश्वरसखित्वं तु मूढ: श्रावयते किल।
 
 
अनुवाद
धनरक्षक कुबेर का दिया हुआ सन्देश मेरे लिए अच्छा नहीं है। वह मूर्ख मुझे डराने के लिए महादेवजी के साथ अपनी मित्रता की कथा सुना रहा है?॥35 1/2॥
 
‘The message given by the money-guard Kubera is not good for me. That fool is telling me the story of his friendship with Mahadevji (to scare me)?॥ 35 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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