श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.13.34-35h 
विज्ञातं ते मया दूत वाक्यं यत् त्वं प्रभाषसे॥ ३४॥
नैव त्वमसि नैवासौ भ्रात्रा येनासि चोदित:।
 
 
अनुवाद
'हे दूत! मैं आपकी बात का अर्थ समझ गया हूँ। अब न तो आप बच सकते हैं और न ही वह भाई जिसने आपको यहाँ भेजा है।
 
‘Messenger! I have understood the meaning of what you are saying. Now neither you nor the brother who has sent you here can survive.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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