श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.13.33-34h 
एवमुक्तो दशग्रीव: कोपसंरक्तलोचन:॥ ३३॥
हस्तान् दन्तांश्च सम्पिष्य वाक्यमेतदुवाच ह।
 
 
अनुवाद
दूत के मुख से ऐसे वचन सुनकर दशग्रीव रावण की आँखें क्रोध से लाल हो गईं। उसने हाथ मलकर और दाँत पीसकर कहा-॥33 1/2॥
 
Hearing such words from the messenger, eyes of Dashagreeva Ravana became red with anger. He rubbed his hands and gnashed his teeth and said-॥ 33 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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