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ramayan 7.13.21: मैं शौच, संतोष आदि नियमों का पालन करते हुए तथा संयमपूर्वक रौद्रव्रत का आश्रय लेकर धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए हिमालय की एक चोटी पर गया था॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 7.13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.13.21 
अहं तु हिमवत्पृष्ठं गतो धर्ममुपासितुम्।
रौद्रं व्रतं समास्थाय नियतो नियतेन्द्रिय:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मैं शौच, संतोष आदि नियमों का पालन करते हुए तथा संयमपूर्वक रौद्रव्रत का आश्रय लेकर धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए हिमालय की एक चोटी पर गया था॥ 21॥
 
I went to a peak of the Himalayas to perform religious rituals by following the rules of cleanliness, satisfaction etc. and by taking recourse to the 'Raudra-vrata' with self-control.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)