Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.13.18: दशग्रीव! अब तक तुमने जो भी दुष्कर्म किए हैं, वे बहुत हो गए। अब तुम्हें सदाचार का संचय करना चाहिए। यदि संभव हो तो धर्म के मार्ग पर बने रहो, यही तुम्हारा कल्याण करेगा॥ 18॥ | ramayan सर्ग 7.13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साधु पर्याप्तमेतावत् कृत्यश्चारित्रसंग्रह:।
साधु धर्मे व्यवस्थानं क्रियतां यदि शक्यते॥ १८॥
अनुवाद
दशग्रीव! अब तक तुमने जो भी दुष्कर्म किए हैं, वे बहुत हो गए। अब तुम्हें सदाचार का संचय करना चाहिए। यदि संभव हो तो धर्म के मार्ग पर बने रहो, यही तुम्हारा कल्याण करेगा॥ 18॥
Dashagriva! Whatever misdeeds you have committed till now, this is enough. Now you should accumulate good conduct. If possible, stay on the path of Dharma; this will be good for you.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥