श्री राम! उस समय रावण का पुत्र रावण के सुन्दर अन्तःपुर में कुलीन स्त्रियों द्वारा सुरक्षित रहकर अपने माता-पिता को परम सुख प्रदान करता हुआ, काष्ठ से ढकी हुई अग्नि के समान बढ़ने लगा ॥31-32॥
Sri Rama! At that time, the son of Ravana, giving immense pleasure to his parents in Ravana's beautiful harem, protected by noble women, started growing like a fire covered with wood. ॥ 31-32॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्वादश: सर्ग: ॥ १ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बारहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ २॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)