श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 12: शूर्पणखा तथा रावण आदि तीनों भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  7.12.31-32 
सोऽवर्धत तदा राम रावणान्त:पुरे शुभे॥ ३१॥
रक्ष्यमाणो वरस्त्रीभिश्छन्न: काष्ठैरिवानल:।
मातापित्रोर्महाहर्षं जनयन् रावणात्मज:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! उस समय रावण का पुत्र रावण के सुन्दर अन्तःपुर में कुलीन स्त्रियों द्वारा सुरक्षित रहकर अपने माता-पिता को परम सुख प्रदान करता हुआ, काष्ठ से ढकी हुई अग्नि के समान बढ़ने लगा ॥31-32॥
 
Sri Rama! At that time, the son of Ravana, giving immense pleasure to his parents in Ravana's beautiful harem, protected by noble women, started growing like a fire covered with wood. ॥ 31-32॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्वादश: सर्ग: ॥ १ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बारहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ २॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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