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ramayan 7.12.17-18h: इसके बाद राक्षसराज मय ने अपनी पुत्री का हाथ रावण के हाथ में देकर, हँसते हुए राक्षसराज से इस प्रकार कहा -॥17 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.12: शूर्पणखा तथा रावण आदि तीनों भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 12: शूर्पणखा तथा रावण आदि तीनों भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.12.17-18h 
करेण तु करं तस्या ग्राहयित्वा मयस्तदा॥ १७॥
प्रहसन् प्राह दैत्येन्द्रो राक्षसेन्द्रमिदं वच:।
 
 
अनुवाद
इसके बाद राक्षसराज मय ने अपनी पुत्री का हाथ रावण के हाथ में देकर, हँसते हुए राक्षसराज से इस प्रकार कहा -॥17 1/2॥
 
After this, the demon king Maya, giving his daughter's hand in Ravana's hand, smilingly spoke to the demon king thus -॥17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)